September 20, 2026

HRDA की निगरानी पर सवालिया निशान, विशाल मार्केट को लेकर जांच की मांग

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)

रुड़की। पुहाना–इकबालपुर रोड पर आरआईटी कॉलेज के सामने बनी एक बड़ी व्यावसायिक मार्केट को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मार्केट के निर्माण को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि मौके पर तैयार किया गया व्यावसायिक परिसर क्या उसी स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप है, जिसके आधार पर निर्माण की अनुमति दी गई थी। मामले की वास्तविक स्थिति अभी आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ दुकानों के निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत होने की बात सामने आ रही है, जबकि मौके पर इससे कहीं अधिक बड़ा व्यावसायिक परिसर दिखाई दे रहा है। ऐसे में हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण यानी HRDA की निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
निर्माण के दौरान निगरानी पर सवाल
स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण स्वीकृत मानचित्र से अलग हुआ है तो निर्माण कार्य के दौरान संबंधित विभागीय अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी। किसी बड़े व्यावसायिक परिसर का निर्माण अचानक नहीं होता। नींव से लेकर ढांचा तैयार होने और दुकानों के निर्माण तक कई चरणों में काम होता है।
ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि क्या HRDA की संबंधित टीम ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। यदि निरीक्षण किया गया था तो मौके पर निर्माण की स्थिति क्या पाई गई और क्या उसका स्वीकृत मानचित्र से मिलान किया गया था।
स्वीकृत नक्शे और मौके की स्थिति हो स्पष्ट
मामले को लेकर स्थानीय लोगों की मांग है कि HRDA स्वीकृत मानचित्र और मौके पर हुए वास्तविक निर्माण की तकनीकी जांच कराए। इसमें यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्माणकर्ता को कितनी दुकानों और कितने क्षेत्रफल के निर्माण की अनुमति दी गई थी और वर्तमान में मौके पर कितना निर्माण मौजूद है।
यदि निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप पाया जाता है तो प्राधिकरण की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने से उठ रहे सवालों का समाधान हो सकता है। वहीं यदि निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मिलीभगत के आरोपों की भी हो जांच
इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर निर्माणकर्ता और संबंधित विभागीय कर्मचारियों के बीच कथित मिलीभगत और सांठगांठ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ऐसे में किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए जाने की जरूरत है।
यदि जांच में नियमों के विपरीत निर्माण की पुष्टि होती है और यह भी सामने आता है कि इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी, तो निगरानी एवं निरीक्षण से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।
छोटे निर्माणों पर कार्रवाई तो बड़े निर्माण पर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि HRDA की ओर से कई मामलों में छोटे निर्माणों के खिलाफ नोटिस और सीलिंग जैसी कार्रवाई की जाती है। ऐसे में मुख्य मार्ग पर बने इतने बड़े व्यावसायिक परिसर को लेकर प्राधिकरण की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होनी चाहिए।
हालांकि केवल निर्माण बड़ा होने के आधार पर उसे अवैध नहीं माना जा सकता। इसकी वैधता का निर्धारण स्वीकृत नक्शे, भवन नियमों और मौके की वास्तविक स्थिति के आधिकारिक सत्यापन से ही होगा।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
अब मांग है कि HRDA के अधिकारी मौके का निरीक्षण कर स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण का मिलान करें। साथ ही संबंधित दस्तावेजों, निरीक्षण रिपोर्ट और निर्माण अनुमति की भी जांच की जाए।
पुहाना की यह मार्केट अब HRDA की निगरानी व्यवस्था को लेकर एक अहम सवाल बन गई है। स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि प्राधिकरण मामले में क्या कदम उठाता है। यदि निर्माण नियमों के अनुरूप है तो स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

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