मिट्टी उठान प्रकरण में शासन की बड़ी कार्रवाई, जिला खनन अधिकारी कासिम रजा हटाए गए
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
हरिद्वार। मोतीचूर क्षेत्र में मिट्टी उठान को लेकर उठे विवाद के बाद शासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जिला खनन अधिकारी कासिम रजा को उनके पद से हटा दिया है। शासन के आदेश के बाद उन्हें खनन निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया है। वहीं उनकी जगह अमित गौरव को हरिद्वार के जिला खनन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस कार्रवाई को शासन द्वारा मामले को गंभीरता से लेने और जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार मोतीचूर क्षेत्र में नाले की खुदाई से निकली मिट्टी को लेकर विवाद सामने आया था। आरोप लगाया गया था कि खुदाई से निकली मिट्टी का उठान नियमों के अनुरूप नहीं किया गया और उसे बिना आवश्यक अनुमति के निजी भूमि पर डाला गया। इस मामले की शिकायत उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के जिलाध्यक्ष गोकुल रावत द्वारा प्रशासन से की गई थी। शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला खनन अधिकारी कासिम रजा को मौके पर जांच के लिए भेजा गया।
बताया जाता है कि जांच के दौरान मौके पर मौजूद यूकेडी जिलाध्यक्ष गोकुल रावत और जिला खनन अधिकारी के बीच तीखी बहस हो गई। आरोप है कि इस दौरान वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट रविंद्र सिंह के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। घटना के बाद मौके का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और राजनीतिक दलों ने इस प्रकरण पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मामले ने जब तूल पकड़ा तो यूकेडी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन कर जिला खनन अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि शिकायत की निष्पक्ष जांच करने के बजाय शिकायतकर्ताओं के साथ अनुचित व्यवहार किया गया। वहीं पत्रकार संगठनों ने भी वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट के साथ कथित अभद्रता के मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से उचित कदम उठाने की मांग की।
प्रकरण की जानकारी शासन स्तर तक पहुंचने के बाद पूरे मामले का संज्ञान लिया गया। इसके बाद शासन ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए जिला खनन अधिकारी कासिम रजा को उनके पद से हटा दिया। शासन के आदेश के अनुसार उन्हें खनन निदेशालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही अमित गौरव को हरिद्वार के जिला खनन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, ताकि विभागीय कार्य प्रभावित न हों।
इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई लोगों का मानना है कि शासन का यह निर्णय सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश है। वहीं स्थानीय लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि मिट्टी उठान प्रकरण की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
फिलहाल शासन की इस कार्रवाई को हरिद्वार जनपद में चर्चित रहे इस प्रकरण का बड़ा प्रशासनिक परिणाम माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने उम्मीद जताई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई को सामने लाया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
