पहले सील, फिर तैयार हो गया मेडिकल कॉलेज! HRDA की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) ने अवैध निर्माणों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सिकरौड़ा रोड स्थित एक निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज पर एक बार फिर सीलिंग की कार्रवाई की है। प्राधिकरण की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध निर्माण कराने वालों में हड़कंप मच गया है, लेकिन साथ ही इस पूरे मामले ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार सिकरौड़ा रोड पर एक मेडिकल कॉलेज का निर्माण बिना मानचित्र स्वीकृति के कराया जा रहा था। नियमों के अनुसार किसी भी व्यावसायिक या संस्थागत भवन का निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित विभाग से मानचित्र स्वीकृत कराना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां निर्माणकर्ता द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य जारी रखा गया।
बताया गया है कि प्राधिकरण को पहले ही इस अवैध निर्माण की जानकारी मिल चुकी थी। इसके बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए गए थे। इतना ही नहीं, कुछ माह पूर्व भी इसी निर्माण पर प्राधिकरण द्वारा सीलिंग की कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य रुकने के बजाय लगातार चलता रहा और देखते ही देखते मेडिकल कॉलेज की इमारत लगभग पूरी तरह तैयार हो गई।
बुधवार को प्राधिकरण की टीम ने एक बार फिर मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच के दौरान निर्माण बिना स्वीकृत मानचित्र के पाया गया, जिसके बाद अधिकारियों ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए भवन को दोबारा सील कर दिया और निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
HRDA की उपाध्यक्ष सोनिका ने कहा कि बिना मानचित्र स्वीकृति के किसी भी प्रकार का निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण लगातार अवैध निर्माणों और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान चला रहा है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
एई टी.एस. पंवार ने बताया कि निर्माणकर्ता को पूर्व में नोटिस देकर कार्य रोकने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इसी कारण दोबारा सीलिंग की कार्रवाई की गई है। वहीं जेई पंकज ने कहा कि निरीक्षण के दौरान निर्माण पूरी तरह अवैध पाया गया, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई गई। कार्रवाई के दौरान सीनियर सुपरवाइजर संजय सहित विभागीय टीम मौजूद रही।
हालांकि इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब कुछ महीने पहले ही भवन को सील किया जा चुका था तो उसके बाद निर्माण कार्य कैसे जारी रहा? यदि निर्माण अवैध था तो जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की? आखिर किसकी शह पर यह निर्माण कार्य आगे बढ़ता रहा या फिर इसे जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
अब क्षेत्र के लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कार्रवाई केवल सीलिंग तक सीमित रहेगी या फिर अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण, जुर्माना और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने जैसी आगे की कार्रवाई भी की जाएगी। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

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