स्वामी विवेकानंद कॉलेज विवाद में प्रबंधन का पलटवार, झूठे आरोप लगाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की। रुड़की के मतलबपुर स्थित स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ एजुकेशन और इंपीरियल एजुकेशन ट्रस्ट से जुड़े विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। कॉलेज प्रबंधन ने संस्थान पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार, भर्ती घोटाले और अनियमितताओं के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि और आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
कॉलेज प्रशासन की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में ट्रस्ट से जुड़े अरविंद सैनी, आर.पी. सिंह और कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. विकास कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि कुछ लोग निजी स्वार्थ और व्यक्तिगत द्वेष के चलते संस्थान की छवि खराब करने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार झूठी शिकायतें, आरटीआई आवेदन और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कॉलेज को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रबंधन का कहना है कि जिन मामलों को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनमें से अधिकांश की जांच पहले ही शासन स्तर पर हो चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में उत्तराखंड सरकार द्वारा गठित जांच समिति ने संबंधित मामलों की जांच की थी, जिसमें उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया था। जांच के बाद रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग उन्हीं मामलों को बार-बार उठाकर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
अरविंद सैनी ने कहा कि कॉलेज में सभी नियुक्तियां आरक्षण रोस्टर और शासनादेशों के अनुरूप की गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस समूह ‘ग’ भर्ती घोटाले का आरोप लगाया जा रहा है, उस प्रकार की कोई भर्ती संस्थान में हुई ही नहीं है। ऐसे में भर्ती घोटाले के आरोप पूरी तरह तथ्यहीन और दुर्भावनापूर्ण हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार पर भी गंभीर चिंता जताई। उनका आरोप है कि कुछ लोग लगातार ट्रस्टियों और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ अपमानजनक सामग्री प्रसारित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, ट्रस्टियों का पीछा करने, उनके घरों तक पहुंचने और परिवार पर दबाव बनाने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे उन्हें सुरक्षा का खतरा महसूस हो रहा है।
कॉलेज प्रशासन ने पुलिस और जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जो सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से झूठे आरोप लगाकर संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रबंधन का कहना है कि यदि यह गतिविधियां नहीं रुकीं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मानहानि के मुकदमे दायर किए जाएंगे।
प्रबंधन ने यह भी कहा कि संस्थान वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है और हजारों छात्र-छात्राएं यहां अध्ययन कर चुके हैं। वर्ष 2021 से अब तक बड़ी संख्या में छात्रों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया गया है और महाविद्यालय पूरी तरह नियमानुसार संचालित हो रहा है।
रीना चौहान प्रकरण समेत अन्य व्यक्तिगत मामलों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को भी कॉलेज प्रशासन ने भ्रामक बताया। उनका कहना है कि निजी मामलों को जानबूझकर संस्थान से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है ताकि कॉलेज की छवि धूमिल हो सके।
अब इस पूरे विवाद को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक ओर शिकायतकर्ता लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कॉलेज प्रबंधन इसे संस्थान को बदनाम करने की साजिश बता रहा है। ऐसे में लोगों की नजर अब प्रशासन और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
