रुड़की के बीएसएम इंटर कॉलेज परिसर में ‘अशासकीय विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन, उत्तराखंड’ का प्रथम प्रांतीय अधिवेशन आयोजित
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की। उत्तराखंड के अशासकीय विद्यालयों की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और संस्थानों के भविष्य को लेकर रुड़की के बीएसएम इंटर कॉलेज परिसर में ‘अशासकीय विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन, उत्तराखंड’ का प्रथम प्रांतीय अधिवेशन आयोजित किया गया। अधिवेशन में प्रदेशभर से आए विद्यालय प्रबंधकों, शिक्षाविदों और पदाधिकारियों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीर चर्चा की। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों ने भाग लेते हुए समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक ने अपने संबोधन में अशासकीय विद्यालयों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में इन संस्थानों का योगदान सराहनीय रहा है। बोर्ड परीक्षाओं में लगातार बेहतर परिणाम और छात्र संख्या में वृद्धि इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सरकार अशासकीय विद्यालयों की समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीर है और जल्द ही मुख्यमंत्री तथा शिक्षा मंत्री के साथ उच्च स्तरीय बैठक आयोजित कर ठोस निर्णय लिए जाएंगे। अधिवेशन की अध्यक्षता कर रहे परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने विद्यालय प्रबंध समितियों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य राजकीय और अशासकीय विद्यालयों के बीच की दूरी को समाप्त कर समान शैक्षिक वातावरण तैयार करना है। उन्होंने संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर गंभीरता से विचार करने और समस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसा दिलाया। अधिवेशन के दौरान शिक्षकों और प्रबंधकों की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए शासन-प्रशासन के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने पर जोर दिया गया। प्रदेशभर से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को मंच पर रखा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के सुझाव भी दिए। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि अशासकीय विद्यालय प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की मजबूत रीढ़ हैं और इन्हें कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। प्रांतीय संरक्षक चंद्र मोहन सिंह पयाल ने एसोसिएशन की ओर से दोनों मंत्रियों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। इनमें भर्तियों के लिए प्रस्तावित चयन बोर्ड के गठन को समाप्त करने, प्रबंध समितियों का कार्यकाल तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने, 90 दिनों से अधिक रिक्त पदों को निरस्त करने संबंधी आदेश वापस लेने तथा पीटीए शिक्षकों के मानदेय में वृद्धि और उनके विनियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग प्रमुख रही। इसके अलावा विद्यालयों में रिक्त पड़े पदों पर शीघ्र पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग उठाई गई। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष एवं बीएसएम शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष ममतेश कुमार शर्मा ने कहा कि अशासकीय विद्यालयों के अस्तित्व को समाप्त करने की किसी भी मंशा को सफल नहीं होने दिया जाएगा। वहीं प्रांतीय महामंत्री संजीव विरमानी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन के लिए मजबूर होगा। इससे पूर्व कार्यक्रम संयोजक रजनीश कुमार शर्मा और प्रधानाचार्य कैप्टन अजय कौशिक ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. घनश्याम गुप्ता और अभय ढोढ़ियाल ने संयुक्त रूप से किया। अधिवेशन में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह अधिवेशन प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में अशासकीय विद्यालयों की भूमिका और भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
