हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की सुस्ती से निर्माण कार्य ठप,दो महीने से फाइलें लंबित,दी चेतावनी

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की/भगवानपुर। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण में मानचित्र स्वीकृति की धीमी प्रक्रिया ने आम लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। स्थिति यह है कि लोग अपने घर बनाने के लिए महीनों से प्राधिकरण के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। करीब दो महीने से लंबित मानचित्रों के कारण लोगों में नाराजगी और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
भगवानपुर क्षेत्र के कई लोगों ने आरोप लगाया है कि प्राधिकरण की लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली के चलते उनके मानचित्र स्वीकृत नहीं हो पा रहे हैं। स्थानीय निवासी निशा, रहमान, रवि, अब्दुल रहमान, मखनपुर निवासी बिजेंद्र और चोल्ली शहबुद्दीनपुर के शमशाद समेत कई लोगों ने बताया कि उन्होंने समय पर सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए थे, इसके बावजूद उनकी फाइलें दो महीने से अधिक समय से अटकी हुई हैं।
लोगों का कहना है कि बार-बार प्राधिकरण के कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। हर बार उन्हें केवल इंतजार करने के लिए कहा जाता है। इससे न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि निर्माण कार्य में देरी के कारण आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि एक ओर प्राधिकरण अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करता है और बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण कार्य करने पर तुरंत कार्रवाई की चेतावनी देता है, वहीं दूसरी ओर मानचित्र पास करने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है। ऐसे में लोगों के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि जब समय पर मानचित्र स्वीकृत ही नहीं होंगे, तो वे नियमों का पालन करते हुए निर्माण कार्य कैसे शुरू करें।
प्रभावित लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे प्राधिकरण के उच्चाधिकारियों से मिलकर शिकायत करेंगे और जरूरत पड़ी तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाएंगे। उनका कहना है कि प्रशासन को आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाना चाहिए।
इस पूरे मामले ने हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्राधिकरण कब तक लंबित फाइलों का निस्तारण करता है और लोगों को राहत मिलती है या नहीं। फिलहाल, क्षेत्र में प्राधिकरण के प्रति असंतोष का माहौल साफ तौर पर देखा जा सकता है।

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