दहेज उत्पीड़न, संपत्ति विवाद और आजीविका के मामलों पर महिला आयोग का सख्त रुख, महिला आयोग ‘आपके द्वार’ जनसुनवाई में 18 मामलों की सुनवाई में तुरंत निस्तारण

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

हरिद्वार। महिलाओं से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान और उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान ‘महिला आयोग आपके द्वार’ के तहत बुधवार को हरिद्वार के जिलाधिकारी सभागार में महत्वपूर्ण जनसुनवाई आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने की। इस दौरान आयोग की सदस्य विमला नैथानी और कमला जोशी भी मौजूद रहीं। जनसुनवाई में महिलाओं से जुड़े विभिन्न मामलों पर गंभीरता से सुनवाई की गई और कई मामलों का मौके पर ही समाधान कराया गया।
जनसुनवाई में कुल 18 फरियादियों ने अपनी समस्याएं आयोग के समक्ष रखीं। इनमें से कई शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि चार गंभीर मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए आयोग मुख्यालय देहरादून भेजा गया। सुनवाई के दौरान घरेलू विवाद, संपत्ति विवाद, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और आजीविका से जुड़े कई संवेदनशील मामले सामने आए, जिन पर आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
जनसुनवाई के दौरान एक गंभीर मामला हरिद्वार के एक निजी अस्पताल मेट्रो हॉस्पिटल से जुड़ा सामने आया। अस्पताल में कार्यरत दो महिला चिकित्सकों ने आयोग को बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने पिछले एक वर्ष और नौ महीने से उनका वेतन रोक रखा है। इस पर अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अस्पताल प्रबंधन समिति को निर्देश दिया कि वे 16 मार्च को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों और एक सप्ताह के भीतर दोनों महिला चिकित्सकों का बकाया वेतन चेक के माध्यम से जारी करें।
इसी प्रकार एक अन्य महिला ने अपने पति पर विवाहेतर संबंध रखने और दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आयोग से शिकायत की। मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने तत्काल जांच के आदेश दिए और दोनों पक्षों को आयोग के समक्ष तलब किया है।
वहीं एक अनपढ़ विधवा महिला ने अपने जेठ पर उसकी संपत्ति हड़पने और उसे उसके अधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया। इस मामले में अध्यक्ष ने जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देशित किया कि पीड़िता को उसके हिस्से की संपत्ति का कब्जा दिलाने के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जनसुनवाई में मनसा देवी मंदिर मार्ग पर दुकान हटाए जाने से प्रभावित गरीब महिलाओं की आजीविका का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। इस पर अध्यक्ष ने नगर आयुक्त, नगर निगम हरिद्वार को निर्देश दिए कि इन महिलाओं को आजीविका के लिए उचित स्थान पर दुकान उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी रोजी-रोटी प्रभावित न हो।
इसके अतिरिक्त आयोग ने एक पीड़िता को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज महिलाओं से जुड़ी शिकायतों पर संबंधित नोडल अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
इस दौरान अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि महिला आयोग के निर्देशों को कोई भी विभाग हल्के में न ले। उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देशित किया कि आयोग द्वारा भेजे गए पत्रों पर समयबद्ध जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी महिला कर्मचारी को अपने विभाग की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की जांच से संतुष्टि नहीं है तो उसकी निष्पक्ष पुनः जांच कराई जाए।
अध्यक्ष ने सभी विभागों को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित कानून (POSH) के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की समस्याओं का समाधान शासन और प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और पीड़ित महिलाओं को केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि वास्तविक न्याय मिलना चाहिए।
जनसुनवाई के दौरान वन स्टॉप सेंटर की समीक्षा भी की गई, जिसमें बताया गया कि इस वर्ष दर्ज 490 मामलों में से 488 का सफल निस्तारण किया जा चुका है।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी एल.एन. मिश्रा, एसपी क्राइम निशा यादव, सदस्य सचिव महिला आयोग उर्वशी चौहान, पुलिस अधीक्षक यातायात, परियोजना निदेशक, मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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