September 22, 2026

आईआईटी रुड़की में संकाय सदस्यों ने निकाला मौन मार्च, आईआईटी बॉम्बे की घटना पर जताई चिंता

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)

रुड़की, 22 सितंबर 2026। आईआईटी बॉम्बे में हाल ही में हुई घटना को लेकर आईआईटी रुड़की के संकाय सदस्यों ने चिंता व्यक्त की है। इसी क्रम में 21 सितंबर 2026 की शाम करीब 6:15 बजे आईआईटी रुड़की परिसर में संकाय सदस्यों की ओर से एक मौन मार्च निकाला गया। मार्च के माध्यम से दिवंगत छात्र के परिवार और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के साथ-साथ शैक्षणिक व्यवस्था, मूल्यांकन प्रक्रिया और जांच से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

मौन मार्च के बाद संकाय सदस्यों ने विभिन्न बिंदुओं पर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए संकल्प लिया। इसमें सबसे पहले आईआईटी बॉम्बे के दिवंगत छात्र के परिवार और मित्रों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई। संकाय सदस्यों ने कहा कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संस्थानों को हरसंभव आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

शैक्षणिक प्रक्रियाओं की मजबूती पर जोर

संकाय सदस्यों ने यह भी कहा कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक प्रक्रियाओं और मूल्यांकन प्रणालियों की कठोरता, निष्पक्षता और गरिमा को बनाए रखना आवश्यक है। इसके साथ ही इन प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार के लिए भी सभी उचित उपाय किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता और मूल्यांकन की विश्वसनीयता को कायम रखना महत्वपूर्ण है।

बिना दबाव के दायित्व निभाने की अपील

संकाय सदस्यों ने इस बात पर भी जोर दिया कि शिक्षकों और अन्य संबंधित लोगों को बिना किसी भय, दबाव या अनुचित हस्तक्षेप के अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी घटना को लेकर जांच पूरी होने से पहले होने वाली चर्चाओं या निष्कर्षों के कारण शैक्षणिक कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।

जांच पूरी होने तक आरोपों से बचने की अपील

आईआईटी रुड़की के संकाय सदस्यों ने छात्र समुदाय, संकाय सदस्यों, उनके परिवारों और समाज से विशेष अपील की कि चल रही जांच के दौरान किसी भी संबंधित छात्र या संकाय सदस्य के खिलाफ आरोप लगाने से बचा जाए। उन्होंने कहा कि जब तक जांच से विश्वसनीय साक्ष्य सामने नहीं आते, तब तक किसी व्यक्ति को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

संवेदनशीलता और निष्पक्षता बनाए रखने पर बल

संकाय सदस्यों ने पूरे मामले में संवेदनशीलता, संयम और निष्पक्षता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। मौन मार्च को इसी भावना के साथ देखा गया, जिसमें दिवंगत छात्र के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ संस्थागत प्रक्रियाओं की मजबूती और निष्पक्ष जांच के महत्व को सामने रखा गया।

आईआईटी रुड़की की ओर कहा गया कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सभी संभावित उपाय किए जाने चाहिए। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में ऐसा वातावरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जहां विद्यार्थी और शिक्षक अपने दायित्वों का निर्वहन विश्वास और गरिमा के साथ कर सकें। संकाय सदस्यों ने उम्मीद जताई कि संबंधित जांच से तथ्यों और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी तथा सभी पक्ष जांच प्रक्रिया के प्रति धैर्य और संयम बनाए रखेंगे।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

प्रमुख खबरे

error: Content is protected !!