चिन्हीकरण नहीं हुआ तो 2 अक्टूबर को राज्य आंदोलनकारी सम्मान पत्र लौटाएंगे – हर्ष प्रकाश काला
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
रुड़की। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति की ओर से मंगलवार को संयुक्त मजिस्ट्रेट रुड़की कार्यालय पर चिन्हीकरण से वंचित राज्य आंदोलनकारियों को चिन्हित किए जाने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया। धरने में बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारियों ने हिस्सा लिया और सरकार से लंबित मामलों में शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
धरने के दौरान 85 वर्षीय वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी चक्रधर देवरानी ने कहा कि अब आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में और देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने “चिन्हित नहीं तो वोट नहीं” का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कई आंदोलनकारी भाजपा के समर्थक रहे हैं, लेकिन यदि राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान नहीं किया जाता तो इस विषय पर गंभीरता से विचार करना होगा।
2016 से बैठकों के बावजूद नहीं हुआ चिन्हीकरण
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति के केंद्रीय अध्यक्ष एवं रुड़की के प्रथम एवं वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी हर्ष प्रकाश काला ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण की लड़ाई में रुड़की की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी हरिद्वार की अध्यक्षता में वर्ष 2016 से चिन्हीकरण को लेकर बैठकें होती रही हैं और संबंधित प्रमाण-पत्रों का अधिकारियों द्वारा सत्यापन भी किया गया है, इसके बावजूद कई आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण नहीं हुआ।
काला ने कहा कि अब यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 24 सितंबर 2026 तक सभी वंचित राज्य आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण नहीं किया गया, तो वह 2 अक्टूबर 2026 को शहीद स्मारक पर मुख्यमंत्री को अपना राज्य आंदोलनकारी सम्मान पत्र वापस कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सभी आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण तक वह पेंशन भी नहीं लेंगे।
पांचवीं अनुसूची लागू करने की उठी मांग
अनिल उप्रेती और प्रवेश जोशी ने कहा कि राज्य बने 26 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आंदोलनकारियों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पाया है। उन्होंने उत्तराखंड में पांचवीं अनुसूची लागू करने की मांग भी उठाई। सुरेंद्र कुकरेती ने आंदोलन में रुड़की के आंदोलनकारियों की सक्रिय भूमिका का उल्लेख करते हुए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
केंद्रीय कोषाध्यक्ष कमला बमोला ने कहा कि रुड़की उत्तराखंड आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारियों के मामले सरकार को गंभीरता से लेने चाहिए। कार्यक्रम का संचालन भी कमला बमोला ने किया।
चुनाव बहिष्कार की घोषणा
उत्तराखंड क्रांति दल की खानपुर विधानसभा की भावी प्रत्याशी रीतू कंडियाल ने कहा कि आंदोलनकारियों के सम्मान और राज्य की मूल भावना को लेकर जनता को विचार करना होगा। उत्तराखंड एकता मंच और उक्रांद ने आंदोलनकारियों के हर संघर्ष में साथ देने का आश्वासन दिया।
शकुन्तला सती ने चिन्हीकरण न होने पर रोष जताते हुए आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की घोषणा की। धरने में मौजूद आंदोलनकारियों ने सामूहिक रूप से “चिन्हीकरण नहीं तो चुनाव नहीं” का नारा देते हुए चुनाव बहिष्कार की घोषणा की।
धरने के बाद मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार, मुख्य सचिव, अपर गृह सचिव और जिलाधिकारी हरिद्वार को संबोधित ज्ञापन संयुक्त मजिस्ट्रेट रुड़की को सौंपे गए। संयुक्त मजिस्ट्रेट ने आंदोलनकारियों को शासन-प्रशासन से वार्ता कराने तथा चिन्हीकरण की प्रक्रिया में सहयोग का आश्वासन दिया।
धरने में विमला बिष्ट, गवर सिंह चौधरी, महिपाल सिंह नेगी, महेश्वर देवरानी, अमृता खनशाली, देवेश्वरी खंडूरी, सर्वेश्वरी चमोली, रामेश्वरी खंतवाल, सुरमा रावत, सरस्वती खनका, शर्मिला कंडारी, आशा नेगी, मंगला रौतेला, विद्या नेगी, भुवन चंद्र पंत, देव सिंह सांवत, जीवांनंद बुडाकोटी, विनोद भट्ट, प्रदीप बुडाकोटी, भागीरथी मुडेपी, कुंवर सिंह नेगी, मयंक मुंडेपी, दरवान सिंह नेगी, जशोदा बलूनी, नीमा किरोला, विवेकानंद डोभाल, गायत्री पंत, बासुदेव पंत, राजू कंडियाल, माहेश्वरी पटवाल, पार्वती रावत, अंकित राणा, होमी जोशी, भुवनेश्वरी बौठियाल, बसंती चमोली और सीता राणा सहित सैकड़ों आंदोलनकारी मौजूद रहे।
