September 10, 2026

सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए IIT रुड़की और उत्तर प्रदेश सरकार की बड़ी पहल, कार्बन क्रेडिट इकोसिस्टम होगा विकसित

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)

रुड़की, 9 सितंबर 2026। जलवायु-स्मार्ट और सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT रुड़की) ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी की है। IIT रुड़की ने कृषि निदेशालय, उत्तर प्रदेश सरकार तथा दो उद्योग साझेदारों Compliance Kart Pvt. Ltd. और Trayambhu Tech Solutions Pvt. Ltd. के साथ दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह सहयोग “Carbon Credits Initiation and Its Benefits for Sustainable Agriculture in Uttar Pradesh” कार्यक्रम के तहत किया गया है। कार्यक्रम को पब्लिक–प्राइवेट–एकेडमिक पार्टनरशिप के रूप में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित, पारदर्शी और किसान-केंद्रित कार्बन क्रेडिट इकोसिस्टम तैयार करना है।

इस पहल के माध्यम से जलवायु-स्मार्ट और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मृदा जैविक कार्बन बढ़ाने, जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता में सुधार और कृषि क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा कृषि वानिकी और जैव विविधता को बढ़ावा देकर किसानों को उभरते कार्बन बाजार और कार्बन वित्त से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार के निदेशक कृषि एवं संबद्ध सेवाएँ टी.एम. त्रिपाठी ने कहा कि सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग को एक मंच पर लाने वाली यह साझेदारी प्रदेश में सतत कृषि को उभरते कार्बन बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों के लिए नए अवसर पैदा होने के साथ जलवायु लचीलापन और सतत संसाधन प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।

Compliance Kart Pvt. Ltd. के CEO आलोक पांडेय ने कहा कि IIT रुड़की और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर तकनीक आधारित कार्बन क्रेडिट इकोसिस्टम विकसित करना महत्वपूर्ण अवसर है। वहीं Trayambhu Tech Solutions Pvt. Ltd. के CEO प्रबीर मिश्रा ने कहा कि तकनीक, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और जमीनी स्तर के कार्यान्वयन को एक साथ लाकर किसानों की कार्बन क्रेडिट इकोसिस्टम में भागीदारी को मजबूत किया जा सकता है।

IIT रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि संस्थान वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी नवाचार को ऐसे समाधानों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनसे सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव पैदा हो। उनके अनुसार यह साझेदारी सतत कृषि, जलवायु लचीलापन और किसानों के लिए नए आर्थिक अवसरों की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है।

इस फ्रेमवर्क के तहत IIT रुड़की Technical and Scientific Nodal Agency के रूप में कार्य करेगा। संस्थान वैज्ञानिक कार्यप्रणालियों, Project Design Documents की समीक्षा, निगरानी प्रणाली, Digital Monitoring, Reporting and Verification (D-MRV), वैज्ञानिक मूल्यांकन, गुणवत्ता समीक्षा, क्षमता निर्माण और तकनीकी समन्वय में भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में सैटेलाइट इंटीग्रेशन, GIS मैपिंग, GPS आधारित फील्ड सिस्टम, मोबाइल एप्लिकेशन, IoT, डिजिटल ऑडिट ट्रेल और ट्रांसपेरेंसी डैशबोर्ड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल प्रस्तावित है। इससे परियोजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता और ट्रेसेबिलिटी को मजबूत किया जाएगा।

प्रारंभिक चरण में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिलों को शामिल किया जाएगा। इस चरण में पांच लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करने की योजना है। आवश्यक अनुमोदन और प्रदर्शन मूल्यांकन के बाद कार्यक्रम को उत्तर प्रदेश के अन्य कृषि-जलवायु क्षेत्रों तक विस्तार देने की संभावना है।

यह पहल भारत की विकसित हो रही Carbon Credit Trading Scheme (CCTS) के अनुरूप है और Verra VCS तथा Gold Standard जैसे लागू कार्बन बाजार मानकों को भी ध्यान में रखती है। पाँच वर्ष के प्रारंभिक फ्रेमवर्क के तहत बेसलाइन प्लानिंग, परियोजना-विशिष्ट समझौते, D-MRV की तैनाती और किसानों के ऑनबोर्डिंग के जरिए कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

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