मानचित्र स्वीकृति में देरी को लेकर आर्किटेक्ट्स में आक्रोश, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
रुड़की। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) में भवन मानचित्रों की स्वीकृति प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर आर्किटेक्ट, इंजीनियर और ड्राफ्ट्समैन में नाराजगी बढ़ती जा रही है। विभिन्न समस्याओं के समाधान और मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल एवं तेज करने की मांग को लेकर आर्किटेक्ट एसोसिएशन की ओर से ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की दीपम रामचंद्र शेठ को ज्ञापन सौंपा गया। एसोसिएशन ने कहा कि यदि आपत्तियों के निस्तारण और फाइलों की जांच में तेजी लाई जाए तो आम लोगों को राहत मिलने के साथ निर्माण कार्य और सरकारी राजस्व, दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है।
ज्ञापन में बताया गया कि आवासीय एवं व्यवसायिक भवनों के मानचित्रों की स्वीकृति के दौरान अलग-अलग स्तरों पर बार-बार आपत्तियां लगने से फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती हैं। आर्किटेक्ट्स का कहना है कि कई मामलों में फाइलें जेई, एई से लेकर अधीक्षण अभियंता स्तर तक अटकी रहती हैं। इससे आवेदकों को अपने भवन निर्माण की स्वीकृति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और निर्माण कार्य भी प्रभावित होता है।
निर्देशांक और सैटेलाइट इमेज को लेकर उठाए सवाल
एसोसिएशन ने ज्ञापन में मानचित्र स्वीकृति के दौरान सामने आने वाली तकनीकी समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। आर्किटेक्ट्स के अनुसार विक्रय पत्र में दिए गए निर्देशांक और स्थल निरीक्षण के दौरान दर्ज किए गए निर्देशांकों में अंतर हो सकता है। वहीं स्थल निरीक्षण के दौरान लिए गए फोटोग्राफ में स्वतः दर्ज होने वाले निर्देशांकों में भी कुछ मीटर का अंतर आने की संभावना रहती है।
इसके अलावा गूगल मैप और सैटेलाइट इमेज के आधार पर लगाई जाने वाली आपत्तियों को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की मांग की गई। एसोसिएशन का कहना है कि सैटेलाइट तस्वीरें समय-समय पर अपडेट होती हैं, इसलिए पुरानी तस्वीरों के आधार पर वर्तमान स्थिति पर आपत्ति लगाने से आवेदकों के सामने अनावश्यक परेशानी खड़ी हो सकती है।
स्वीकृत मानचित्रों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कई नए क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन आते हैं, जहां आसपास पहले से स्वीकृत मानचित्र उपलब्ध नहीं होते। ऐसे मामलों में आर्किटेक्ट और इंजीनियर के लिए निकटतम स्वीकृत मानचित्र उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। एसोसिएशन ने मांग की कि प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत मानचित्रों का ऐसा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए, जिसे पंजीकृत आर्किटेक्ट, इंजीनियर और ड्राफ्ट्समैन आवश्यकतानुसार देख सकें।
इसके साथ ही मानचित्र स्वीकृति के लिए स्पष्ट चेक लिस्ट जारी करने की मांग की गई। इससे आवेदक पहले से सभी जरूरी दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे तथा बार-बार लगने वाली आपत्तियों में कमी आएगी।
राजस्व बढ़ने की भी जताई उम्मीद
आर्किटेक्ट्स का कहना है कि मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया तेज होने से आवासीय और व्यवसायिक भवनों के निर्माण कार्य समय पर शुरू हो सकेंगे। इससे निर्माण गतिविधियों में तेजी आएगी और विभिन्न मदों के माध्यम से सरकार को मिलने वाले राजस्व में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इसलिए अधिकारियों को लंबित फाइलों और आपत्तियों के निस्तारण के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने दिया आवश्यक निर्देशों का आश्वासन
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपम रामचंद्र शेठ ने बताया कि आर्किटेक्ट एसोसिएशन की ओर से उन्हें ज्ञापन दिया गया है। इसमें बताया गया है कि मानचित्र स्वीकृत करते समय कई तरह की आपत्तियां बार-बार सामने आती हैं, जिसके कारण प्रक्रिया में देरी होती है। विशेष रूप से व्यक्तिगत आवासीय फाइलों का समयबद्ध तरीके से शीघ्र समाधान करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
दो से तीन महीने तक फाइल लंबित रहने की शिकायत पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा कि ऐप में समयबद्ध प्रक्रिया की व्यवस्था है और प्रत्येक स्तर के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है। हालांकि, दस्तावेजों में कमी या आपत्तियों का समय पर निस्तारण नहीं होने की स्थिति में फाइल आगे बढ़ने में देरी हो सकती है।
उन्होंने आवेदकों और आर्किटेक्ट्स से अपील की कि संभावित आपत्तियों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज पहले ही अपलोड कर दिए जाएं। यदि जांच के दौरान कोई कमी या स्पष्टीकरण की जरूरत हो तो उसका तत्काल समाधान किया जाए, ताकि फाइल जल्द स्वीकृत हो सके।
संगठन बनाने की तैयारी
वहीं आर्किटेक्ट, इंजीनियर और ड्राफ्ट्समैन ने कहा कि वे अपने हितों और समस्याओं को मजबूती से उठाने के लिए संगठन बनाने पर विचार कर रहे हैं। संगठन को मजबूत करने के लिए जल्द ही एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें संगठन की रूपरेखा और आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि मानचित्र स्वीकृति में देरी समेत अन्य समस्याओं को भविष्य में जोरदार तरीके से संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा।
इस मौके पर आर्किटेक्ट सुनील सैनी के नेतृत्व में शहजाद मोहन, दानिस गौड़, अनिल कुमार, नूर आलम, सागर कश्यप, सचिन कुमार, तफजिल अंसारी, हयात एजाज, विपिन कुमार, हिमांशु गुप्ता, वासिम अंसारी, अनिल वर्मा, मनोज, मशकूर हसन, रोबिन सहित रुड़की क्षेत्र के अन्य आर्किटेक्ट एवं ड्राफ्ट्समैन मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की/संयुक्त सचिव, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण से मुलाकात कर मानचित्र स्वीकृति से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग रखी।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि ज्ञापन के बाद प्राधिकरण स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं और लंबित मानचित्र फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया में कितनी तेजी आती है।
