भगवानपुर में अवैध निर्माण का महाघोटाला! करोड़ों की व्यावसायिक मार्केटें तैयार, कार्रवाई सिर्फ नोटिसों तक सीमित?
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
उत्तराखंड सरकार भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती है, लेकिन भगवानपुर क्षेत्र में सामने आए कथित अवैध व्यावसायिक निर्माणों ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा है कि करोड़ों रुपये की दो बड़ी व्यावसायिक मार्केटें तैयार होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
जानकारी के अनुसार, भगवानपुर हाईवे पर एक विशाल व्यावसायिक मार्केट लगभग पूरी तरह तैयार हो चुकी है। वहीं भगवानपुर-इमलीखेड़ा मार्ग पर भी दूसरी व्यावसायिक मार्केट का निर्माण तेजी से पूरा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े निर्माण कार्य कई महीनों तक चलते रहे, लेकिन प्राधिकरण की ओर से इन्हें शुरुआती चरण में रोकने के बजाय केवल नोटिस जारी करने तक ही कार्रवाई सीमित रही।
शुरुआत में कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध थे तो नींव पड़ने, कॉलम खड़े होने और निर्माण के शुरुआती चरण में ही कार्रवाई क्यों नहीं की गई? जब निर्माण लगभग पूरा हो गया, तब नोटिस जारी करने का क्या औचित्य रह जाता है? यही सवाल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या कानून सभी के लिए समान है?
लोगों का आरोप है कि आम नागरिकों द्वारा छोटे निर्माण या नक्शे में मामूली त्रुटि होने पर प्राधिकरण तत्काल नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई करता है, जबकि बड़े व्यावसायिक निर्माणों के मामलों में कार्रवाई की गति धीमी दिखाई देती है। हालांकि इस संबंध में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
संयुक्त सचिव के कार्यालय के पास बना कॉम्प्लेक्स
भगवानपुर-इमलीखेड़ा मार्ग पर स्थित प्राधिकरण के संयुक्त सचिव के कार्यालय के निकट ही एक बड़ी व्यावसायिक मार्केट तैयार होने से भी कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण प्राधिकरण की जानकारी में नहीं था तो यह प्रशासनिक लापरवाही का विषय हो सकता है, और यदि जानकारी थी तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
नोटिस के बाद कार्रवाई क्यों रुकी?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई मामलों में पहले नोटिस जारी किए जाते हैं, लेकिन उसके बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई लंबे समय तक नहीं होती। इसी दौरान निर्माण कार्य पूरा हो जाता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि नोटिस जारी होने के बाद ध्वस्तीकरण या अन्य कार्रवाई किस स्तर पर रुक गई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
जनता के सवाल
करोड़ों रुपये की व्यावसायिक मार्केटों का निर्माण किसकी निगरानी में हुआ?
निर्माण के दौरान प्राधिकरण की टीम ने क्या कार्रवाई की?
नोटिस जारी होने के बाद आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी?
क्या दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
अब उपाध्यक्ष के निर्णय पर निगाहें
अब पूरे मामले में लोगों की निगाहें हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष पर टिकी हैं। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि निर्माण नियमों के अनुरूप था या नहीं, और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।



