उत्तराखंड में जल, जंगल, जमीन और रोजगार बचाने को फिर आंदोलन की जरूरत: हर्ष प्रकाश काला
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
रुड़की, 20 सितंबर 2026। उत्तराखंड में जल, जंगल, जमीन, रोजगार और मूल निवास से जुड़े मुद्दों को लेकर उत्तराखंड एकता मंच एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति की संयुक्त बैठक अशोक नगर में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के समुचित विकास, पलायन रोकने और उत्तराखंड की सभ्यता एवं संस्कृति के संरक्षण को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने उत्तराखंड को संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
बैठक में जिला संयोजक सुशील रावत ने उत्तराखंड के लिए पांचवीं अनुसूची की आवश्यकता पर विचार रखे। वहीं स्वामी दिनेशानंद भारती ने पांचवीं अनुसूची लागू होने से संभावित लाभों और इसके माध्यम से जल, जंगल, जमीन तथा स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के मुद्दे पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उत्तराखंड में तेजी से हो रहे बदलावों और पलायन पर चिंता व्यक्त की।
जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए संघर्ष की जरूरत
उत्तराखंड एकता मंच के केंद्रीय संयोजक अनूप वेगी ने पर्वतीय राज्यों में पांचवीं अनुसूची से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय हितों की रक्षा करनी है तो पांचवीं अनुसूची लागू करने के लिए व्यापक संघर्ष करना होगा। उन्होंने गांवों को मजबूत बनाने और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की व्यवस्था के लाभों का उल्लेख करते हुए जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और जौनसार-बावर क्षेत्र के उदाहरण दिए।
वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में पलायन रोकने, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा सभ्यता-संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए स्थानीय समुदायों की भूमिका मजबूत करना जरूरी है। बैठक में जातिगत भेदभाव समाप्त करने की दिशा में भी पांचवीं अनुसूची के संभावित महत्व पर चर्चा की गई।
काला बोले—विकास के लिए फिर बड़े आंदोलन की जरूरत
बैठक की अध्यक्षता उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति के केंद्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी हर्ष प्रकाश काला ने की। उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद भी जल, जंगल और जमीन से जुड़े कई सवाल कायम हैं। उन्होंने कहा कि मकान बनाने के लिए लकड़ी प्राप्त करने से लेकर नदी से रेत निकालने तक स्थानीय लोगों को विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
काला ने कहा कि उत्तराखंड में बांध और विद्युत परियोजनाएं स्थापित हो रही हैं, लेकिन इनसे मिलने वाले लाभ को लेकर स्थानीय लोगों के हितों पर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड का वास्तविक विकास करना है तो राज्य निर्माण आंदोलन की तरह एक और व्यापक संघर्ष की आवश्यकता है।
राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण पर जताई नाराजगी
हर्ष प्रकाश काला ने राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया में कथित शिथिलता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारियों के पास आंदोलन के समय की उपस्थिति और कार्यवाही रजिस्टर सहित प्रमाण उपलब्ध हैं, जो वर्ष 2017 से जिलाधिकारी कार्यालय में जमा बताए गए हैं। इसके बावजूद चिन्हीकरण नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई।
उन्होंने सभी चिन्हित और चिन्हीकरण से वंचित राज्य आंदोलनकारियों से 22 सितंबर को सुबह 10 बजे रुड़की तहसील परिसर स्थित संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचने का आह्वान किया।
केंद्रीय कोषाध्यक्ष कमला बमोला ने कहा कि 22 सितंबर को दोपहर 2 बजे तक एक दिवसीय धरना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि 23 सितंबर तक चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण नहीं किया गया तो संगठन “चिन्हित नहीं तो वोट नहीं” अभियान चलाएगा। इस संबंध में 22 सितंबर को मुख्यमंत्री के नाम संयुक्त मजिस्ट्रेट के माध्यम से ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
बैठक में प्रवेज जोशी, सुरेंद्र सिंह नेगी, रीतू कंडियाल, जिवानंद बुडाकोटी, शिव चरण बिंजौला, सरोज थपलियाल, सरोज बड़थ्वाल, सीता राणा, बसंती चमोली, शकुंतला सती, मालती नेगी, विजय सिंह रावत, ममता कुंवर, हिम्मत सिंह राणा, मधु रावत, राजेंद्र सिंह रावत, राजू कंडियाल, प्रदीप बुडाकोटी, बबलू नेगी, रामेश्वरी खंतवाल, सुरमा रावत, योगंबर सिंह रौथाण, सिताम्बरी नेगी, लीला नेगी सहित विभिन्न कॉलोनियों के सैकड़ों निवासी मौजूद रहे।
बैठक के समापन पर सुरेंद्र सिंह नेगी ने 22 नवंबर को देहरादून में प्रस्तावित रैली में अधिक से अधिक लोगों से पहुंचने का आह्वान किया। रीतू कंडियाल की ओर से उपस्थित लोगों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई।


