142 एकड़ सरकारी भूमि के मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा, सरकारी जमीनों को निजी हाथों में नहीं जाने देगी कांग्रेस: राजेंद्र चौधरी
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
रुड़की। उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और बेशकीमती सरकारी संपत्तियों को लीज पर दिए जाने के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रुड़की महानगर कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी एडवोकेट ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि सरकारी भूमि और संपत्तियां जनता की संपत्ति हैं और इन्हें निजी हाथों में देने से पहले पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस नोट में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने विभिन्न सरकारी विभागों की भूमि और संपत्तियों को लीज अथवा अन्य माध्यमों से निजी संस्थाओं को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया है। कांग्रेस ने इस व्यवस्था में उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (यूआईआईडीबी) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
142 एकड़ भूमि की लीज का मामला उठाया
राजेंद्र चौधरी ने प्रेस नोट में वर्ष 2023 में करीब 142 एकड़ सरकारी भूमि को राजस्व ऐरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को 15 वर्ष की लीज पर दिए जाने के मामले का उल्लेख किया। कांग्रेस का दावा है कि संबंधित भूमि का बाजार मूल्य करीब 30 हजार करोड़ रुपये बताया गया, जबकि लीज राशि लगभग एक करोड़ रुपये प्रतिवर्ष होने की बात कही गई है। कांग्रेस ने इस मामले में भूमि के मूल्य और लीज शर्तों को लेकर पारदर्शिता की मांग की है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि जिस भूमि पर सरकारी धन खर्च किया गया, उसी संपत्ति को बाद में निजी कंपनी को लीज पर देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पार्टी ने इस पूरे मामले की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।
जॉर्ज एवरेस्ट लीज का भी किया उल्लेख
प्रेस नोट में जॉर्ज एवरेस्ट लीज का भी उल्लेख किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि सरकारी विभागों की जमीन और संपत्तियों को लंबे समय के लिए लीज पर देने से संबंधित व्यवस्था के लिए 17 अक्टूबर 2023 को उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कानून लाया गया। कांग्रेस ने इस कानून और इसके तहत होने वाली प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
1200 एकड़ भूमि से जुड़े प्रस्तावों का दावा
कांग्रेस के अनुसार करीब 1200 एकड़ यानी लगभग 6000 बीघा भूमि से संबंधित प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री की मंजूरी की प्रक्रिया हुई है, जबकि कई हजार बीघा भूमि से जुड़े प्रस्ताव विभिन्न स्तरों पर लंबित बताए गए हैं। पार्टी ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अनुशंसा समिति की भूमिका को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की है।
विश्वविद्यालयों के लिए भूमि आवंटन पर भी सवाल
कांग्रेस ने 15 मार्च 2024 की बैठक का हवाला देते हुए देहरादून में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के लिए 10 एकड़ तथा राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय के लिए 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्तावों का भी जिक्र किया। कांग्रेस ने इन प्रस्तावों और इनके संबंध में लिए गए निर्णयों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
सरकारी संपत्तियां सार्वजनिक हित से जुड़ी: चौधरी
राजेंद्र चौधरी एडवोकेट ने कहा कि सरकारी जमीन और संपत्तियां सीधे तौर पर सार्वजनिक हित से जुड़ी हैं। इसलिए इन्हें लीज या अन्य माध्यम से निजी उपयोग के लिए दिए जाने की प्रक्रिया, नियम, शर्तें और संबंधित संपत्तियों का उद्देश्य जनता के सामने स्पष्ट होना चाहिए।
प्रेस वार्ता में जिला उपाध्यक्ष डॉ. हरविंदर सिंह, मदन पाल भड़ाना, संजय गुड्डू, जिला महामंत्री मुनफेत अली, वैभव सैनी, मोहित त्यागी, कार्यालय सचिव नूर आलम राजा सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे।
वहीं, सरकार की ओर से अलग-अलग मौकों पर सरकारी संपत्तियों के बेहतर उपयोग, निवेश और विकास को बढ़ावा देने की नीति की बात कही जाती रही है। ऐसे में अब सरकारी भूमि को लीज अथवा अन्य माध्यम से दिए जाने की प्रक्रिया, उसके नियमों और सार्वजनिक हित से जुड़े प्रावधानों को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों पर सरकार के आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।
