शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म करने का आरोपी गिरफ्तार, महिला अपराध पर सख्त हरिद्वार पुलिस
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
हरिद्वार। कोतवाली रानीपुर पुलिस ने शादी का झांसा देकर युवती के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। पुलिस के अनुसार मामले में पीड़िता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी, जिसके बाद पुलिस टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 8 जून 2026 को एक युवती ने कोतवाली रानीपुर में तहरीर देकर आरोप लगाया कि अमित कश्यप नामक युवक ने उससे शादी का वादा कर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। युवती का आरोप है कि बाद में आरोपी अपने वादे से मुकर गया तथा उसके साथ गाली-गलौज भी की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा अपराध संख्या 199/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 एवं 352 के अंतर्गत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज किए और उसका चिकित्सीय परीक्षण भी कराया। इसके साथ ही नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया। लगातार की जा रही तलाश के दौरान पुलिस ने 4 जुलाई 2026 को आरोपी अमित कश्यप को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान अमित कश्यप (31 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय नाथीराम, निवासी मकान संख्या 624, आवास विकास मॉडल कॉलोनी, रानीपुर मोड़, कोतवाली ज्वालापुर, जनपद हरिद्वार के रूप में हुई है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से आगे की विधिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
कोतवाली रानीपुर पुलिस का कहना है कि महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों को लेकर जनपद पुलिस पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई कर रही है। ऐसे मामलों में प्राप्त शिकायतों पर तत्काल मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाती है तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक मनोहर सिंह भण्डारी, उपनिरीक्षक सन्दीपा भण्डारी तथा कांस्टेबल अमन तोमर शामिल रहे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी पीड़ित को बिना भय के पुलिस से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
नोट: यह मामला पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और शिकायत पर आधारित है। आरोपी को न्यायालय में दोष सिद्ध होने तक कानून की दृष्टि में निर्दोष माना जाता है।
