महाराणा प्रताप के नाम पर समाज में ज़हर घोलने वालों पर हो कार्रवाई: समीर आलम

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की। समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव समीर आलम ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग वीर योद्धा महाराणा प्रताप की प्रतिमा के पास खड़े होकर आपत्तिजनक गाने और भड़काऊ बातें कर रहे हैं, जो न केवल समाज में नफरत फैलाने का काम है बल्कि महान योद्धा महाराणा प्रताप की छवि को भी खराब करने की कोशिश है।
समीर आलम ने कहा कि महाराणा प्रताप ऐसे महान शासक थे जिन्होंने हमेशा सभी धर्मों का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि वीडियो बनाने वाले लोगों को इतिहास की सही जानकारी नहीं है और वे सोशल मीडिया की अधूरी जानकारी के आधार पर समाज को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने युद्ध मुगलों की सत्ता के खिलाफ लड़े थे, न कि भारत के मुसलमानों के खिलाफ।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप को मुस्लिम समाज पर पूरा भरोसा था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध है, जिसमें महाराणा प्रताप की सेना का नेतृत्व उनके वफादार सेनापति हकीम खान सूरी ने किया था। हकीम खान सूरी ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। समीर आलम ने कहा कि महाराणा प्रताप की सेना और प्रशासन में कई मुस्लिम महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे। उन्होंने काजी खान और अन्य मुस्लिम अधिकारियों को तोप, गोला-बारूद और हथियारों की जिम्मेदारी भी सौंपी थी।
समीर आलम ने आगे कहा कि महाराणा प्रताप दूसरे धर्मों और महिलाओं के सम्मान को सर्वोपरि मानते थे। उन्होंने एक ऐतिहासिक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब अकबर के सेनापति अब्दुर रहीम खान-ए-खाना के शिविर पर हमला हुआ और उनके परिवार की महिलाओं को बंदी बना लिया गया, तब महाराणा प्रताप ने इस पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने अपने पुत्र अमर सिंह को फटकार लगाते हुए महिलाओं को पूरे सम्मान और सुरक्षा के साथ वापस भेजने का आदेश दिया। महाराणा प्रताप के इस व्यवहार से प्रभावित होकर अब्दुर रहीम खान-ए-खाना ने उनकी प्रशंसा में कई दोहे भी लिखे।
समीर आलम ने कहा कि आज कुछ लोग महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी से ज्ञान लेकर समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल खुद को चमकाना है, जबकि इससे देश और समाज कमजोर होता है।
उन्होंने उत्तराखंड पुलिस से मांग की कि वायरल वीडियो में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि आज पुलिस के पास हर संसाधन उपलब्ध हैं, फिर भी ऐसे लोगों पर कार्रवाई न होना सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि आखिर पुलिस किस दबाव में कार्रवाई करने से बच रही है।
समीर आलम ने मुस्लिम समाज से भी अपील की कि वे इस तरह की भड़काऊ वीडियो पर ध्यान न दें और न ही उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करें। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस प्रकार की नफरत फैलाने वाली सामग्री पोस्ट करता है तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दी जानी चाहिए, ताकि समाज में भाईचारा बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जा सकें।

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