झबरेड़ा में अंबेडकर प्रतिमा पर गरमाई राजनीति: झबरेड़ा विधायक पर कर्णवाल का तंज, कहा– “बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना”

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की के झबरेड़ा क्षेत्र में डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर स्थापित की गई बाबा साहब की प्रतिमा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रतिमा के ‘छोटे कद’ को लेकर भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिला, जिससे क्षेत्र की राजनीति भी गरमा गई है। कार्यकर्ताओं ने इसे बाबा साहब का अपमान बताते हुए जिम्मेदार नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं।दरअसल, झबरेड़ा में “किसान चौक” और “अमर जवान चौक” की तर्ज पर “डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक” का निर्माण कराया गया, जहां लगभग 12.50 लाख रुपये की लागत से प्रतिमा स्थापित की गई। लेकिन अनावरण के बाद से ही प्रतिमा का आकार और स्वरूप सवालों के घेरे में आ गया है। स्थानीय लोगों और बहुजन समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण शख्सियत की प्रतिमा इतनी छोटी होना अस्वीकार्य है।
आज़ाद समाज पार्टी के नेता महक सिंह ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक वीरेंद्र जाति पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह बाबा साहब का अपमान है और बजट में धांधली की गई है। महक सिंह ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस प्रतिमा को भव्य रूप में नहीं बदला गया, तो समाज खुद आगे आकर बड़ी प्रतिमा स्थापित करेगा और इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा।
वहीं भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव सुशील पाटिल ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का इस तरह अपमान किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पाटिल ने कहा कि बहुजन समाज कमजोर नहीं है और अगर जरूरत पड़ी तो समाज खुद अपने संसाधनों से भव्य प्रतिमा स्थापित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी कम ऊंचाई की प्रतिमा लगाकर समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल ने विधायक वीरेंद्र जाति पर तंज कसते हुए कहा कि “बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना” बनने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चौक के आसपास कहीं भी स्पष्ट रूप से “अंबेडकर चौक” का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे पूरे प्रोजेक्ट की गंभीरता पर संदेह होता है।
वहीं दूसरी ओर विधायक वीरेंद्र जाति ने खुद का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिमा के आकार को लेकर कुछ तकनीकी कारण रहे हैं और भविष्य में सुधार किया जा सकता है। हालांकि, इस स्पष्टीकरण से आक्रोशित कार्यकर्ता संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।
इसके अलावा, इस कार्यक्रम से नगर पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, कई निकाय कर्मचारियों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. गौरव चौधरी की अनुपस्थिति ने भी राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इसे पार्टी के अंदरूनी मतभेद और ‘राजनीतिक विद्रोह’ के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, अंबेडकर प्रतिमा का यह विवाद अब सिर्फ एक स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह झबरेड़ा की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं और क्या बहुजन समाज की मांगों को पूरा किया जाता है या नहीं।






