HRDA पर आज़ाद अली के गंभीर आरोप, अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई सिर्फ दिखावा, अवैध निर्माण के मामलों में निष्पक्ष जांच की मांग

(रिपोर्ट दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की/हरिद्वार। जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज़ाद अली ने रुड़की-हरिद्वार विकास प्राधिकरण (HRDA) पर गंभीर आरोप लगाते हुए अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के मामलों में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण द्वारा जिले में चलाई जा रही कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह गई है और जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम नजर नहीं आ रहे हैं।
आज़ाद अली ने आरोप लगाया कि HRDA बड़े स्तर पर कार्रवाई का दावा तो करता है, लेकिन वास्तविकता में यह सिर्फ खानापूर्ति है। उन्होंने कहा कि अफसरशाही के कारण आम जनता का विश्वास कमजोर हो रहा है और जांच प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनके अनुसार “सेटिंग-गेटिंग” के जरिए मामलों को प्रभावित किया जा रहा है, जिससे अवैध निर्माण और प्लाटिंग करने वालों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने दावा किया कि जिले में सैकड़ों ऐसे मामले हैं जहां बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण जारी है, लेकिन विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
उन्होंने बताया कि उन्होंने सात मामलों की शिकायत HRDA को सौंपी थी, लेकिन केवल एक-दो स्थानों पर ही कार्रवाई की गई, वह भी औपचारिकता के तौर पर। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई के दौरान संबंधित अधिकारी मौके पर उपस्थित नहीं रहते और सचल दस्ते के जरिए कार्यवाही कराई जाती है। सचल दस्ते पर उन्होंने उगाही के आरोप लगाते हुए कहा कि यह टीम आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
आज़ाद अली ने शहर के एक चर्चित आर्किटेक्ट अमन सिंघल पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर बड़े क्षेत्रफल के नक्शे आसानी से पास कराए जा रहे हैं और कम क्षेत्रफल की रजिस्ट्री पर अधिक निर्माण के नक्शे स्वीकृत किए जा रहे हैं, जो नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने ऐसे मामलों में विभाग की चुप्पी को संदेहास्पद बताते हुए संबंधित आर्किटेक्ट को चिन्हित कर ब्लैकलिस्ट करने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि हरिद्वार जिले में ऐसी कोई कॉलोनी नहीं है जहां सील लगाने के बाद निर्माण पूरी तरह बंद हुआ हो। विभागीय संरक्षण के चलते अवैध निर्माण लगातार जारी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे देहरादून समेत प्रदेश के कई बड़े मामलों का खुलासा करेंगे, जिनमें जमीन, रजिस्ट्री और स्मार्ट सिटी से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
वहीं, HRDA सचिव मनीष कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि विभाग को सात शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से तीन मामलों में ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि चार मामलों में नक्शे स्वीकृत पाए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी कार्रवाई नियमानुसार और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाती है, जिसमें नोटिस, सुनवाई और समयसीमा का पालन किया जाता है।
सचल दस्ते पर लगे आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि यदि कोई ठोस साक्ष्य सामने आता है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी शिकायतें टोल-फ्री नंबर या सीधे अधिकारियों तक पहुंचाएं। आर्किटेक्ट के नक्शे से जुड़े मामले पर उन्होंने कहा कि यह उनके संज्ञान में नहीं है, लेकिन इसकी जांच कराई जाएगी। इस पूरे मामले ने एक बार फिर जिले में अवैध निर्माण और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर बहस छेड़ दी है।






