चिन्हीकरण से वंचित राज्य आंदोलनकारियों के लिए संघर्ष तेज, डीएम को सौंपा ज्ञापन

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले उन आंदोलनकारियों के हक में एक बार फिर आवाज बुलंद की गई है, जो अब तक सरकारी चिन्हीकरण प्रक्रिया से वंचित रह गए हैं। इस मुद्दे को लेकर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी हरिद्वार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की।
समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष हर्ष प्रकाश काला, केन्द्रीय कोषाध्यक्ष श्रीमती कमला बमोला और राज्य आंदोलनकारी प्रदीप बुडाकोटी ने संयुक्त रूप से जिलाधिकारी मयूर दीक्षित से भेंट कर वर्ष 2017 से चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारियों को सूचीबद्ध करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के संघर्ष में योगदान देने वाले कई आंदोलनकारी आज भी सरकारी मान्यता से दूर हैं, जो उनके साथ अन्याय है।
ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा गठित एक समिति ने रुड़की तहसील के 260 और हरिद्वार तहसील के 177 आंदोलनकारियों का सत्यापन किया था। बावजूद इसके, इन आंदोलनकारियों का अब तक आधिकारिक रूप से चिन्हीकरण नहीं हो पाया है। समिति ने इन सत्यापित नामों की सूची भी जिलाधिकारी को सौंपते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
हर्ष प्रकाश काला ने कहा कि जब तक सभी वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों को उनका अधिकार और सम्मान नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए, ताकि लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे आंदोलनकारियों को न्याय मिल सके।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलनकारी आगे की रणनीति तय करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान जिन लोगों ने अपना योगदान दिया है, उन्हें सम्मान देना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि मामले पर शीघ्र विचार किया जाएगा। उन्होंने इस संबंध में दो दिन के भीतर आवश्यक कदम उठाने की बात कही है, जिससे आंदोलनकारियों को राहत मिल सके।
यह मुद्दा एक बार फिर राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और अधिकारों को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाता है और लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे आंदोलनकारियों को कब तक न्याय मिल पाता है।






