हरिद्वार में सूखी नदी में मिला एक्सपायर दवाइयों का जखीरा, कंपनी के रैपर मिलने से मचा हड़कंप
(ब्योरो दिलशाद खान KNEWS 18)
हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में दवाइयों के कचरे को खुले में फेंकने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। पेंटागन मॉल के पीछे स्थित सूखी नदी में एक्सपायर दवाइयां और एक कंपनी के रैपर मिलने से दवा अपशिष्ट के निस्तारण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सिडकुल क्षेत्र के रानीपुर रो में बड़ी मात्रा में दवाइयों का कचरा मिलने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। मामले की सूचना जिला प्रशासन को दिए जाने के बाद संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।
जानकारी के अनुसार, रानीपुर रो में नदी के सूखे हिस्से में कूड़े के बीच एक्सपायर दवाइयां और कंपनी के रैपर पड़े मिले। दवाइयों की इतनी बड़ी मात्रा खुले में मिलने से आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण फैलने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने इस मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारी
मामले की सूचना मिलने पर संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग के रीजनल ऑफिसर (आरओ) राजेंद्र टिकट मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां पड़े दवाइयों के कचरे तथा रैपर के संबंध में जानकारी जुटाई। संबंधित कंपनी के प्रबंधन को भी मौके पर बुलाया गया, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
हालांकि, मौके पर पहुंचे कंपनी के अधिकारी मीडिया से दूरी बनाते नजर आए। इस कारण दवाइयों के कचरे के स्रोत और उसे नदी में फेंके जाने की परिस्थितियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। अब जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि दवाइयां किसकी हैं और उन्हें वहां किसने तथा किन परिस्थितियों में फेंका।
फार्मास्यूटिकल वेस्ट के निस्तारण पर उठे सवाल
दवाइयों का कचरा सामान्य घरेलू कचरे की तरह खुले में नहीं फेंका जा सकता। एक्सपायर दवाइयों और अन्य फार्मास्यूटिकल वेस्ट का निस्तारण निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों के अनुसार किया जाना आवश्यक है। ऐसे कचरे को खुले में छोड़ने से मिट्टी और जल स्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा पैदा हो सकता है। इसके अलावा, दवाइयों में मौजूद रासायनिक तत्व पर्यावरण और जीव-जंतुओं के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।
रानीपुर रो में दवाइयों का कचरा मिलने से यह सवाल भी उठ रहा है कि औद्योगिक क्षेत्र में दवा अपशिष्ट के निस्तारण की निगरानी किस प्रकार की जा रही है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के संकेत
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी राजेंद्र टिकट के मुताबिक, मौके पर एक्सपायर दवाइयां और कंपनी के रैपर मिले हैं। मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल इस मामले में जांच के निष्कर्ष और दवाइयों के कचरे के वास्तविक स्रोत का पता लगना बाकी है। यह भी स्पष्ट होना है कि कचरा किसकी जिम्मेदारी के तहत वहां पहुंचा और उसके निस्तारण में किन नियमों का पालन किया गया। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा।
धर्मनगरी हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह दवाइयों का कचरा खुले में मिलना पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक निगरानी व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अब सभी की निगाहें विभागीय जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।




