मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल, 14 साल से न्याय के लिए भटक रहा पीड़ित!आखिर कब मिलेगा पीड़ित की न्याय?
(ब्योरो दिलशाद खान KNEWS 18)
हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और आम जनता को समय पर न्याय दिलाने के दावों के बीच भगवानपुर तहसील से सामने आए एक भूमि विवाद ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपनी जमीन से जुड़े मामले में न्याय की मांग कर रहे अभिषेक शर्मा ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि वह पिछले 14 वर्षों से न्याय के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर न्याय दिलाने की मांग की है।
सड़क निर्माण और भूमि विवाद को लेकर उठाए सवाल
अभिषेक शर्मा का आरोप है कि उनकी भूमि पर सड़क का निर्माण करा दिया गया, लेकिन भूमि अधिग्रहण, सरकारी अभिलेखों और वास्तविक जमीन की स्थिति को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि वह इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय तक गए, लेकिन उनके अनुसार उन्हें अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली। पीड़ित ने मांग की है कि भूमि से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
दो साल पहले फीस जमा, फिर भी नहीं हुई पैमाइश
पीड़ित के मुताबिक, अपनी भूमि की पैमाइश कराने के लिए उन्होंने एसडीएम भगवानपुर के न्यायालय में वाद दायर किया था। इसके लिए उनसे छह हजार रुपये की फीस जमा कराई गई थी, जिसे उन्होंने करीब दो वर्ष पहले जमा कर दिया। इसके बावजूद उनकी जमीन की पैमाइश नहीं कराई गई। अभिषेक शर्मा का आरोप है कि बाद में उनका वाद निस्तारित कर दिया गया।
इस मामले में सवाल उठता है कि फीस जमा होने के बाद भी पैमाइश क्यों नहीं हुई और वाद निस्तारित करने का आधार क्या रहा। इन तथ्यों की पुष्टि संबंधित सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक पक्ष से होना आवश्यक है।
एसडीएम पर पांच लाख रुपये मांगने का आरोप
अभिषेक शर्मा ने भगवानपुर के एसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि करीब 10 से 12 दिन पहले उनका काम कराने के लिए उनसे पांच लाख रुपये की मांग की गई थी। पीड़ित का आरोप है कि रुपये नहीं देने के बाद उनका मामला निस्तारित कर दिया गया।
हालांकि, कथित रिश्वत मांगने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष लिया गया है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
एसडीएम ने आरोपों को बताया निराधार, मानहानि का दावा करने की दी चेतावनी
भगवानपुरएसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि मामले में नियमानुसार प्रक्रिया चल रही है और शिकायतकर्ता के पास आरोपों को साबित करने के लिए कोई तथ्य नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बेबुनियाद आरोप लगाए गए तो वह मानहानि का दावा करेंगे।
खसरा संख्या 214 के अभिलेखों पर भी सवाल
पीड़ित ने खसरा संख्या 214 से संबंधित भूमि अभिलेखों में गड़बड़ी और अधिग्रहण के दौरान दर्ज माप में अंतर होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1905 पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने मांग की है कि भूमि के मूल दस्तावेजों, अधिग्रहण संबंधी रिकॉर्ड, सड़क निर्माण से जुड़े अभिलेखों और पैमाइश की प्रक्रिया की जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
अभिषेक शर्मा ने मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई नागरिक वर्षों तक अपनी भूमि से जुड़े विवाद के समाधान के लिए भटकता रहता है, तो उसकी शिकायत पर समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार से पूरे मामले की जांच कराने, भूमि संबंधी विवाद का नियमानुसार समाधान करने और आरोप प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है। क्या भूमि की पैमाइश कराकर अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट की जाएगी? क्या कथित रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच होगी? फिलहाल, पीड़ित की मांगों और आरोपों पर प्रशासनिक अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। निष्पक्ष जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


