आईआईटी रुड़की और त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच एमओयू, 500 महिला बुनकरों को मिलेगा लाभ
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
आईआईटी रुड़की, 12 अक्टूबर 2026। त्रिपुरा में पारंपरिक हथकरघा उद्योग को पुनर्जीवित करने और महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को सशक्त बनाने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने महत्वपूर्ण पहल की है। संस्थान और त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन (टीआरएलएम) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस तीन वर्षीय साझेदारी का उद्देश्य त्रिपुरा के तीन जिलों उत्तर त्रिपुरा, उनाकोटी और धलाई की 500 महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) बुनकरों को आधुनिक तकनीक, डिजाइन नवाचार, कौशल विकास और बाजार से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत बनाना है।
इस पहल के माध्यम से पारंपरिक हथकरघा शिल्प को आधुनिक व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही महिला बुनकरों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता, उपयोगिता और बाजार में पहचान बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ समझौता
एमओयू हस्ताक्षर समारोह में त्रिपुरा सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अभिषेक सिंह तथा आईआईटी रुड़की के डिजाइन विभाग के प्रमुख प्रो. ए. के. शर्मा उपस्थित रहे। समझौते पर त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तरित कांति चकमा और आईआईटी रुड़की के डिजाइन विभाग के प्रो. बिभूति रंजन भट्टाचार्य ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार, तकनीकी ज्ञान और कौशल विकास के माध्यम से आजीविका के नए अवसर सृजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रयोगशाला से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगा नवाचार
त्रिपुरा सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अभिषेक सिंह ने अनुसंधान और नवाचार को प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आम लोगों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला से क्षेत्र तक पहुंचने वाला अनुप्रयुक्त अनुसंधान वास्तविक समस्याओं के समाधान और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वहीं, आईआईटी रुड़की के डिजाइन विभाग के प्रमुख प्रो. ए. के. शर्मा ने टिकाऊ ग्रामीण विकास और आजीविका संवर्धन में डिजाइन, तकनीक तथा बहुविषयक ज्ञान की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने समुदायों के साथ मिलकर ऐसी विकासात्मक पहल करने पर जोर दिया, जिनका दीर्घकालिक और व्यावहारिक प्रभाव हो।
डिजिटल बाजार और ब्रांडिंग पर रहेगा विशेष ध्यान
इस साझेदारी के तहत महिला बुनकरों को डिजाइन नवाचार, कौशल प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, उद्यमिता और डिजिटल बाजार तक पहुंच बनाने में सहयोग दिया जाएगा। पारंपरिक बुनाई की तकनीकों को आधुनिक डिजाइन और व्यावसायिक प्रक्रियाओं के साथ जोड़कर उत्पादों को अधिक आकर्षक तथा बाजारोन्मुख बनाने का प्रयास किया जाएगा।
इससे महिला बुनकरों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने, ग्राहकों तक सीधी पहुंच बनाने और स्वरोजगार के अवसरों का विस्तार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही हथकरघा क्षेत्र की मूल्य शृंखला को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की पहल
टीआरएलएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तरित कांति चकमा ने ग्रामीण समुदायों तक ज्ञान, तकनीक और नवाचार पहुंचाने के लिए शैक्षणिक एवं तकनीकी संस्थानों के साथ सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने जमीनी स्तर पर नए अवसर पैदा करने और ग्रामीण परिवारों की आजीविका में सुधार के लिए संस्थागत साझेदारी की भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में प्रो. सौरव अरोड़ा, प्रो. कल्पक के. कुलकर्णी तथा त्रिपुरा के विभिन्न जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले टीआरएलएम के अधिकारियों ने भी भाग लिया।
यह साझेदारी आईआईटी रुड़की की तकनीकी और डिजाइन विशेषज्ञता को टीआरएलएम के ग्रामीण नेटवर्क से जोड़ती है। इससे त्रिपुरा की समृद्ध हथकरघा विरासत को आधुनिक बाजारों तक पहुंचाने, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और टिकाऊ ग्रामीण विकास के नए अवसर विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
