चौली शहाबुद्दीनपुर में 8 हजार वर्गफीट का शेड, प्राधिकरण की कार्यशैली पर उठे बड़े सवाल
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की/भगवानपुर। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) के भगवानपुर क्षेत्र में निर्माण कार्यों की निगरानी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चौली शहाबुद्दीनपुर में लगभग 7 से 8 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में निर्मित एक बड़े शेड को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सामने आई तस्वीरों और क्षेत्रीय चर्चाओं के आधार पर निर्माण की वैधता तथा प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित निर्माण के कुछ हिस्से का मानचित्र प्राधिकरण से स्वीकृत बताया जा रहा है, जबकि शेष हिस्से के संबंध में दावा किया जा रहा है कि उसका निर्माण बिना स्वीकृत मानचित्र के किया गया। हालांकि, इस संबंध में अभी तक हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
यदि यह दावा सही साबित होता है कि निर्माण का एक बड़ा हिस्सा स्वीकृति के दायरे से बाहर है, तो मामला केवल एक अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। यह प्राधिकरण की निगरानी प्रणाली, क्षेत्रीय निरीक्षण व्यवस्था तथा मौके पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। आखिर इतना बड़ा निर्माण कार्य लंबे समय तक चलता रहा और संबंधित विभाग को इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई?
हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण समय-समय पर छोटे अवैध निर्माणों, अनधिकृत प्लॉटिंग और नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी करने, सीलिंग तथा ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई करने का दावा करता रहा है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं या बड़े निर्माणों के मामले में कार्रवाई की गति अलग हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति छोटे स्तर पर बिना अनुमति निर्माण करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाती है। वहीं हजारों वर्गफीट में तैयार हो रहे निर्माण पर समय रहते रोक क्यों नहीं लगाई गई? क्या निर्माण के दौरान निरीक्षण किया गया था? यदि निरीक्षण हुआ तो उसकी रिपोर्ट क्या थी? क्या निर्माणकर्ता से स्वीकृत मानचित्र और आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे? इन सभी प्रश्नों के उत्तर अब प्राधिकरण को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने होंगे।
इस पूरे प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण पहलू अधिकारियों की जवाबदेही का भी है। यदि जांच में यह निर्माण नियमों के विपरीत या स्वीकृत मानचित्र से अधिक पाया जाता है, तो क्या कार्रवाई केवल निर्माणकर्ता तक सीमित रहेगी, या फिर समय रहते निर्माण नहीं रोक पाने वाले संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी? यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत अथवा संरक्षण की भूमिका सामने आती है तो उस पर भी विभागीय कार्रवाई होना आवश्यक माना जा रहा है।
चौली शहाबुद्दीनपुर का यह मामला अब हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली की परीक्षा बन गया है। यदि निर्माण पूरी तरह वैध है तो प्राधिकरण को स्वीकृत मानचित्र और अनुमति संबंधी तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध समान रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सभी की निगाहें प्राधिकरण के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस मामले में पारदर्शी जांच कर सच्चाई सामने लाता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों तक ही सीमित रह जाता है।
