हरेला पर्व पर गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संदेश: ‘हर गाँव का यही पैगाम, एक पेड़ माँ के नाम’

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

हरिद्वार। हरेला पर्व के पावन अवसर पर हरिद्वार वन प्रभाग द्वारा देवनारायण नगर (आसफनगर झाल) में भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जनभागीदारी के माध्यम से उत्तराखंड को और अधिक हरा-भरा एवं समृद्ध बनाना रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर पौधारोपण किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान “एक पेड़ माँ के नाम” तथा “हर गाँव का यही पैगाम, एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। उपस्थित सभी लोगों ने अपनी माताओं के सम्मान और प्रकृति के संरक्षण के लिए एक-एक पौधा लगाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण तैयार करने का एक जनआंदोलन है।
हरेला पर्व उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व पर पौधारोपण की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए देवनारायण नगर में विभिन्न प्रजातियों के छायादार, फलदार एवं औषधीय पौधे लगाए गए। साथ ही इन पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का भी संकल्प लिया गया ताकि भविष्य में ये पौधे विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण को संतुलित रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण आवश्यक है। यदि प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य विशेष अवसरों पर भी पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हरिद्वार वन प्रभाग द्वारा हरेला पर्व के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर व्यापक स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाना, जैव विविधता का संरक्षण करना तथा लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प दोहराया कि वे केवल पौधे लगाएंगे ही नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी करेंगे। पूरे आयोजन के दौरान “हर गाँव का यही पैगाम, एक पेड़ माँ के नाम” तथा “हरित उत्तराखंड, समृद्ध उत्तराखंड” के नारों से वातावरण गूंजता रहा।
हरेला पर्व पर आयोजित यह वृक्षारोपण अभियान पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज की बढ़ती जागरूकता और जनसहभागिता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया। यह पहल न केवल उत्तराखंड की हरित पहचान को मजबूत करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण भी प्रदान करेगी।

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