रुड़की में त्रिस्तरीय पंचायत सम्मेलन का आयोजन, ग्रामीण विकास पर दिया जोर
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
रुड़की, हरिद्वार।** विकासखंड रुड़की में शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास एवं अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी और ग्रामीण क्षेत्रों में जनहित के कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में पंचायतों की कार्यक्षमता बढ़ाने, ग्रामीण विकास को गति देने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया गया।
यह कार्यक्रम निदेशालय पंचायतीराज, उत्तराखंड, देहरादून के पत्र संख्या 2681 दिनांक 5 अक्टूबर 2026 तथा मुख्य विकास अधिकारी, हरिद्वार के पत्र संख्या 1132 दिनांक 6 अक्टूबर 2026 के क्रम में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था से जुड़े जनप्रतिनिधियों को उनकी जिम्मेदारियों, योजनाओं के संचालन और विकास कार्यों की गुणवत्ता के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
### पंचायतों को मजबूत बनाने पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को प्रभावी बनाने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित करने और सरकारी योजनाओं को ग्रामीण जनता तक पहुंचाने के महत्व पर चर्चा की गई। पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका गांवों के विकास में महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता देने, योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने और स्थानीय समस्याओं के समाधान में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया गया।
यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि उत्तराखंड सरकार पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाने और पंचायतों को अधिक अधिकार व संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गांवों का विकास देश की प्रगति का आधार है। पंचायत प्रतिनिधि पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ विकास कार्य पूरे कराएं, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
ब्लॉक प्रमुख लुबना राव ने कहा कि पंचायतों को सशक्त बनाना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण कार्यक्रम से जनप्रतिनिधियों को सरकारी योजनाओं की बेहतर जानकारी मिलेगी। सभी पंचायत प्रतिनिधि आपसी समन्वय, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें, ताकि गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
### जनप्रतिनिधियों ने की सहभागिता
कार्यक्रम में ऋषिपाल बालियान, सह संयोजक आपदा प्रबंधन, सतीश कौशिक, वरिष्ठ भाजपा नेता, अहमद, अल्पसंख्यक मोर्चा मंत्री, आजम, जिला पंचायत सदस्य, बड़ेडी राजपूतान, उप ब्लॉक प्रमुख श्रवण कुमार, अध्यक्ष प्रधान संगठन अकरम जावेद, पूर्व प्रधान संगठन के अध्यक्ष, नरेंद्र कुमार, भंगेडी महावतपुर तथा सुरुचि प्रधान, बहादरपुर राजपूतान सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जनप्रतिनिधियों की सहभागिता के माध्यम से पंचायत व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। ग्रामीण विकास कार्यों को बेहतर बनाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण रही।
### अधिकारियों ने संभाली कार्यक्रम की जिम्मेदारी
कार्यक्रम का संचालन खंड विकास अधिकारी रुड़की सुमन कुटियाल दत्ताल एवं सहायक खंड विकास अधिकारी सुभाष सैनी ने किया। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी जयवीर सिंह, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) रहे। अधिकारियों ने कार्यक्रम के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
### सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के प्रति अधिक जागरूक बनाना रहा। पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास, स्थानीय समस्याओं का समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण कार्य हैं।
कार्यक्रम में पंचायतों की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने, विकास कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर ध्यान देने तथा ग्रामीण जनता की जरूरतों के अनुसार प्राथमिकताएं निर्धारित करने की उपयोगिता पर जोर दिया गया। इस प्रकार के क्षमता विकास कार्यक्रम पंचायत प्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाने में सहयोग प्रदान करते हैं। साथ ही, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का मार्ग भी प्रशस्त होता है।


