आईआईटी रुड़की में एएनआरएफ अनुसंधान एवं प्रभाव सम्मेलन-2026 का आयोजन, 127 से अधिक शोध प्रस्तुतियां रहीं आकर्षण का केंद्र

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की, 8 अगस्त 2026। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के सहयोग से एएनआरएफ एवं आईआईटी रुड़की अनुसंधान एवं प्रभाव सम्मेलन-2026 का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य अनुसंधान की दृश्यता बढ़ाने, विभिन्न विषयों के शोधकर्ताओं के बीच अंतर्विषयी सहयोग को प्रोत्साहित करने तथा शोध को सामाजिक प्रभाव से जोड़ना रहा।

उद्घाटन समारोह में आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत, प्रो. पोननुरंगम कुमारगुरु सहित संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारी, संकाय सदस्य, शोधकर्ता और एएनआरएफ से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे। सम्मेलन में एएनआरएफ अनुदान प्राप्तकर्ताओं, पीएचडी शोधार्थियों, उत्तर-स्नातक शोधकर्ताओं और युवा वैज्ञानिकों ने सक्रिय भागीदारी की।

50 से अधिक त्वरित शोध प्रस्तुतियां

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण एएनआरएफ अनुदान प्राप्तकर्ता मिलन रहा, जिसमें 50 से अधिक संक्षिप्त शोध प्रस्तुतियां दी गईं। इनमें मूलभूत विज्ञान, उन्नत सामग्री, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, जैव-प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचा, जलवायु एवं जल विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे विषय शामिल रहे।

प्रस्तुत शोध कार्यों में क्वांटम सामग्री, अतिचालकता, सतत उत्प्रेरण, दवा वितरण, अल्जाइमर रोग, स्मार्ट स्वास्थ्य निगरानी, मीथेन उत्सर्जन, नदी प्रणालियों में एंटीबायोटिक प्रदूषण, पेरोव्स्काइट सौर सेल, लिथियम पुनर्प्राप्ति, सतत बुनियादी ढांचा, इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक और अगली पीढ़ी के वायरलेस संचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर शोध प्रस्तुत किया गया।

77 पोस्टरों में दिखी शोध की विविधता

कार्यक्रम के समापन चरण में पीएचडी विद्यार्थियों के पोस्टर भ्रमण एवं संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इसमें 77 शोध पोस्टर प्रदर्शित किए गए। विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ताओं ने शोधार्थियों के साथ संवाद कर उनके अनुसंधान कार्यों को समझा और सुझाव दिए। पोस्टरों में सिविल एवं केमिकल इंजीनियरिंग, भूकंप इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, रसायन विज्ञान, जैव-विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, फोटोनिक्स, भौतिकी, पृथ्वी विज्ञान और जल संसाधन सहित कई विषय शामिल रहे।

शोध को आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर

सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यावहारिक उपयोग पर विशेष सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न प्रारूपों और भाषाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान को अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा जटिल वैज्ञानिक जानकारी को आम जनता के लिए सरल एवं सुलभ बनाने में तकनीक की भूमिका पर चर्चा हुई।

आईआईटी रुड़की शोधकर्ताओं को पारंपरिक अकादमिक प्रकाशनों के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों के जरिए अपने शोध, नवाचार और तकनीकों को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं पर खुली चर्चा

कार्यक्रम में “भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं की पहचान: चुनौतियां और संभावित समाधान” विषय पर एएनआरएफ के साथ खुली चर्चा भी हुई। इसमें शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों ने उभरते अनुसंधान क्षेत्रों, वर्तमान चुनौतियों और राष्ट्रीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के अवसरों पर विचार साझा किए।

एक ही दिन में 50 से अधिक त्वरित प्रस्तुतियों और 77 पोस्टरों सहित 127 से अधिक अनुसंधान प्रस्तुतियों ने सम्मेलन को विशेष बना दिया। आयोजन ने शोधकर्ताओं को एक-दूसरे के कार्यों से परिचित होने, नए सहयोग तलाशने और अपने अनुसंधान को प्रभावी एवं सरल तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर दिया। सम्मेलन ने अनुसंधान उत्कृष्टता को दृश्यता, सहयोग और सामाजिक प्रभाव से जोड़ने की आईआईटी रुड़की की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

प्रमुख खबरे

error: Content is protected !!